अब ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर नहीं देना होगा ₹1 भी टैक्स! जानें पूरा कैलकुलेशन | Income Tax New Updates

भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 (असेसमेंट ईयर 2027-28) के लिए इनकम टैक्स के नियमों में व्यापक बदलाव किए हैं। 17 मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नए ‘आयकर अधिनियम 2025’ ने पुराने 1961 के कानून की जगह ले ली है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल बनाना और मध्यम वर्ग के हाथ में अधिक पैसा छोड़ना है। सबसे बड़ी राहत उन लोगों को मिली है जिनकी वार्षिक आय ₹12 लाख तक है, क्योंकि प्रभावी रिबेट के कारण उनका टैक्स अब शून्य हो गया है।

नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) 2026 के ताजा स्लैब

वर्ष 2026 में नई टैक्स व्यवस्था को और अधिक आकर्षक बनाया गया है। सरकार ने स्लैब की संख्या कम की है और टैक्स रेट्स को युक्तिसंगत बनाया है।

कुल वार्षिक आय (₹)टैक्स दर (2026-27)
0 से 4,00,000शून्य (NIL)
4,00,001 से 8,00,0005%
8,00,001 से 12,00,00010%
12,00,001 से 16,00,00015%
16,00,001 से 20,00,00020%
20,00,001 से 24,00,00025%
24,00,000 से ऊपर30%

विशेष नोट: ₹12,00,000 तक की आय पर धारा 87A के तहत ₹60,000 की रिबेट मिलती है, जिससे प्रभावी टैक्स जीरो हो जाता है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन और अलाउंस में भारी बढ़ोतरी: 17 मार्च 2026 का अपडेट

नौकरीपेशा व्यक्तियों (Salaried Employees) के लिए आयकर विभाग ने 2026 के नियमों में कई भत्तों की सीमा बढ़ा दी है ताकि बढ़ती महंगाई को संतुलित किया जा सके।

स्टैंडर्ड डिडक्शन: इसे ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि ₹12.75 लाख तक की सैलरी वाले व्यक्ति को अब कोई टैक्स नहीं देना होगा।

बच्चों की शिक्षा: पहले केवल ₹100 प्रति माह मिलने वाली छूट को बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह (प्रति बच्चा) कर दिया गया है।

होस्टल अलाउंस: इसे ₹300 से बढ़ाकर अब ₹9,000 प्रति माह कर दिया गया है।

फ्री मील (Free Meals): ऑफिस की ओर से मिलने वाले खाने के कूपन पर टैक्स छूट की सीमा ₹50 से बढ़ाकर ₹200 प्रति मील कर दी गई है।

पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था: 2026 में कौन सी बेहतर है?

17 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, अधिकांश करदाताओं के लिए नई टैक्स व्यवस्था (NTR) अधिक फायदेमंद साबित हो रही है। हालांकि, जो लोग होम लोन के ब्याज (Section 24b), एलआईसी, पीपीएफ (Section 80C) और मेडिक्लेम (Section 80D) में भारी निवेश करते हैं, उनके लिए पुरानी व्यवस्था अभी भी बचत का जरिया हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था अब ‘डिफ़ॉल्ट’ होगी, इसलिए यदि आप पुरानी व्यवस्था चुनना चाहते हैं, तो आपको आईटीआर फाइल करते समय इसे विशेष रूप से चुनना होगा।

शेयर बाजार और डिजिटल एसेट्स पर नए टैक्स नियम

निवेशकों के लिए 2026 के नियम थोड़े सख्त हुए हैं। अब शेयर बायबैक (Share Buyback) से प्राप्त राशि को ‘कैपिटल गेन’ माना जाएगा और शेयरधारक को अपनी स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा। इसके अलावा, क्रिप्टो करेंसी (Crypto Assets) की रिपोर्टिंग को लेकर सख्त नियम लागू हुए हैं। अब बैंकों और वित्तीय संस्थानों को हर ट्रांजैक्शन की जानकारी सीबीडीटी (CBDT) को देनी होगी। सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में भी मामूली वृद्धि की गई है, जिससे फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करना थोड़ा महंगा हो गया है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष राहत: 2026 की बड़ी घोषणा

17 मार्च 2026 के नए नियमों के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक) को मिलने वाली ब्याज आय पर छूट की सीमा को दोगुना कर दिया गया है। अब बैंक और पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ₹1,00,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके साथ ही, उनके लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ भी बरकरार रखा गया है, जिससे सेवानिवृत्त लोगों की कर-योग्य आय में काफी कमी आएगी।

निष्कर्ष: टैक्स प्लानिंग के लिए 2026 एक सुनहरा वर्ष

समापन में, 17 मार्च 2026 के ये इनकम टैक्स अपडेट्स स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि सरकार का झुकाव कम टैक्स रेट और सरल अनुपालन (Compliance) की ओर है। ₹12 लाख तक की आय को टैक्स फ्री करना मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक कदम है। हालांकि, अधिकतम लाभ उठाने के लिए करदाताओं को अपनी आय और निवेश के अनुसार सही टैक्स व्यवस्था का चुनाव करना चाहिए। आयकर अधिनियम 2025 के आने से अब रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया अधिक तेज और डिजिटल हो गई है, जिससे रिफंड भी कुछ ही दिनों में वापस मिल रहे हैं।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी 17 मार्च 2026 तक की बजट घोषणाओं और आयकर अधिसूचनाओं पर आधारित है। टैक्स कैलकुलेशन आपकी कुल आय, निवेश और उम्र के अनुसार अलग हो सकता है। सटीक गणना के लिए अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से सलाह लें या आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल का उपयोग करें।

Leave a Comment